Saturday, October 24, 2020
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भारत को ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं: डॉ निशंक

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने शुक्रवार को कहा कि वह एक ग्लोबल माइंडसेट और ग्लोबल अप्रोच के साथ भारत को उच्च शिक्षा के एक ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉÞ निशंक ने यहाँ  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) के राष्ट्रों के राजदूतों की उपस्थिति में आसियान पीएचडी फेलोशिप कार्यक्रम के पहले बैच का स्वागत किया और उन्हें भारत में अनुकूल शिक्षा का परिवेश एवं वातावरण देने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, “इस Ÿफेलोशिप कार्यक्रम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सभी दस आसियान देशों के नेताओं की उपस्थिति में की थी। इसके तहत आसियान देशों के 1000 छात्र भारत के आईआईटी संस्थानों में पीएचडी कर सकेंगे। मैं आसियान देशों से आने वाले सभी छात्रों को यह आश्वासन देना चाहता हूँ कि उन्हें हमारे देश, हमारी शिक्षण संस्थाओं द्वारा भारतीय बच्चों की तरह अनुकूल शिक्षा का अनुकूल परिवेश एवं वातावरण मिलेगा।”
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और आसियान देशों की 25 वर्षों से भी अधिक पुरानी साझेदारी और भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की मजबूती का यह ज्वलंत प्रमाण है। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए सबसे बड़े क्षमता विकास कार्यक्रमों में से एक है हम एक ग्लोबल माइंडसेट और ग्लोबल अप्रोच के साथ हम भारत को उच्च शिक्षा के एक ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण’, ‘स्टडी इन इंडिया’ के साथ ही ‘क्वालिटी एजुकेशन’ पर हमारा खास फोकस है और आज का कार्यक्रम इसी दिशा में उठाए गए एक सकारात्मक कदम है। डॉÞ निशंक ने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रतीक है कि भारत अपने ‘अतिथि देवो भव तथा वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच के साथ-साथ इस ग्लोबलाइज्ड संसार में सर्वे भवंतु सुखिन: की संस्कृति को सदैव पोषित करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। हम पूरे विश्व को एक साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते है।
उन्होंने भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों का भी जिक्र किया और कहा, “भारत एवं आसियान देशों का संबंध बहुत गहरा, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक है और यह केवल एक सम्पर्क नहीं है बल्कि एक लाइव लिंक है। यह लिंक केवल ढाई-तीन दशकों में तैयार नहीं हुआ है बल्कि हमारी जड़ें बौद्ध धर्म, दर्शन एवं रामायण महाकाव्य से जुड़ी हुई हैं। आसियान देशों में भारतीय फिल्मों की शूंिटग, रामलीला का मंचन, अंकोरवाट का मंदिर जैसे तमाम उदाहरण हमारे ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों की कहानी सुनाते हैं।
हमारी संस्कृति और सभ्यता के जुड़ाव चिर काल से रहे है , यह कार्यक्रम उन जुड़ावों को और मज़बूती देगा।” उन्होनें नेशनल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस, आसियान-इंडिया एमिनेंट पर्सन लेक्चर सीरीज, आसियान इंडिया स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम, मीडिया एक्सचेंज प्रोग्राम, डिप्लोमेट ट्रेंिनग प्रोग्राम आदि का भी उल्लेख किया और कहा कि यह भारत और आसियान देशों के सहयोग और संपर्क का अतुल्य संबंध है। इसमें आसियान देशों के राष्ट्रदूतों के अलावा केंद्रीय राज्य शिक्षा मंत्री संजय धोत्रे, उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे, सचिव रीवा गांगुली दास आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो राम गोपाल एवं छात्र इस कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा जुड़े।

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