आगामी विधानसभा चुनाव में ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो सकते हैं प्रदीप भट्ट ?

0
26

उत्तरकाशी के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले प्रदीप भट्ट वर्तमान में अपने गृह जनपद उत्तरकाशी से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य हैं और जिला पंचायत संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद प्रदीप भट्ट ने बहुत जल्द ही प्रदेश की राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दी थी.

पहले वो उत्तराखंड यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव बने और फिर उसके बाद प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता के पद पर रहते हुए प्रदीप भट्ट मीडिया के समक्ष जिस बेबाकी से अपनी पार्टी का पक्ष रखते थे उससे उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था. यही कारण था जब हरीश रावत मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने प्रदीप भट्ट को अन्य पिछड़ा वर्ग का उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया था लेकिन कांग्रेस संगठन में उनके खिलाफ अंदरूनी प्रतिस्पर्धा से उन्होंने ये पदभार ग्रहण नही किया था.

2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रदीप भट्ट ने गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस में अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन उन्हें टिकट नही मिल सका. उसके बाद 2019 में हुए जिला पंचायत सदस्य के लिए उन्होंने अपने गृह क्षेत्र गाजणा से टिकट की मांग की लेकिन फिर भी कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया. लगातार कांग्रेस में टिकट न मिलने से उपेक्षित महसूस हो रहे प्रदीप भट्ट ने अंततः निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और उन्होंने भारी बहुमत से जीत दर्ज की. इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त करा दी.

जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद से प्रदीप भट्ट निरंतर अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में लगे हुए हैं और अब उनकी नजर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर हैं. अब सवाल ये उठता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में किस राजनीतिक पार्टी की नाव में सवार होंगे प्रदीप भट्ट? क्या वे फिर से कांग्रेस की नाव पर  सवार होंगे या फिर किसी अन्य पार्टी की नाव पर. पिछले कुछ समय से प्रदीप भट्ट की जिस तरह बीजेपी के कुछ मंत्रियों एवं नेताओं के साथ लगातार नजदीकियां देखी जा रही है उससे ये भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि वे भाजपा के नाव पर भी सवार हो सकते हैं. आखिर 2022 तक क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस बात कि सम्भावना जताई जा रही है की आगामी विधानसभा चुनाव में गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र से वे राजनीतिक दलों के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here