म्‍यांमार में तख्‍तापलट में शामिल 11 लोगों पर यूरोपीय संघ ने लगाया प्रतिबंध

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यूरोपीय संघ के विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने ब्रसेल्स में संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत से पहले यह घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि म्यांमार में हालात बिगड़ते ही चले जा रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने हैं उनके नाम तब ही सार्वजनिक किए जाएंगे जब संघ के सदस्य देशों के मंत्री औपचारिक रूप से उन पर फैसला ले लेंगे। संघ म्यांमार की सेना द्वारा चलाए जाने वाले व्यापारों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है और इस संबंध में और कड़े कदमों के लागू किए जाने की संभावना है।
संघ के राजदूतों ने रॉयटर्स को बताया है कि सेना की बड़ी कंपनियों म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और म्यांमार इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन को निशाना बनाया जा सकता है। यूरोपीय निवेशकों और बैंकों को इन कंपनियों के साथ व्यापार करने से रोका जा सकता है। इन कंपनियों की जड़ें म्यांमार की पूरी अर्थव्यवस्था में फैली हुई हैं। ये खनन, उत्पादन और खाने-पीने की चीजों से लेकर होटलों, टेलीकॉम और बैंकिंग तक मौजूद हैं।
देश के सबसे बड़े करदाताओं में इनका स्थान है और देश जब लोकतांत्रिक उदारीकरण के तहत खुला था तब इन कंपनियों ने विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी भी करनी चाही थी। 2019 में संयुक्त राष्ट्र के एक तथ्य-खोजी मिशन ने इन दोनों कंपनियों और इनकी नियंत्रित कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधों की सिफारिश की थी। संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि ये कंपनियां सेना को पैसों के अतिरिक्त स्त्रोत देती हैं, जिनका इस्तेमाल सेना मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए कर सकती है। यूरोपीय संघ ने म्यांमार के खिलाफ हथियारों के व्यापार पर रोक लगा रखी है। 2018 से ही संघ ने म्यांमार की सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाए हैं।
इस बीच, जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने कहा है कि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के निशाने पर सिर्फ वो लोग हैं जो सड़कों पर हो रही हिंसा के जिम्मेदार हैं और इनके पीछे आम लोगों को सजा देने की कोई मंशा नहीं है। मास ने ब्रसेल्स में पत्रकारों को बताया, “हत्याओं की संख्या बर्दाश्त करने की हद को पार कर गई है और इसी वजह से हम प्रतिबंध लगाना रोक नहीं पाएंगे।”

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