Thursday, October 22, 2020
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विज्ञान के पास मानवीय समस्याओं के निदान की अपार क्षमता: डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिक मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज कहा कि विज्ञान के पास मानव जीवन से जुड़ी समस्याओं का निदान करने की अपार क्षमता है।  केंद्रीय मंत्री गुरुवार को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी अनुसंधान (आईएमएमटी) भुवनेश्वर के 57वें स्थापना दिवस समारोह में वर्चुअल माध्यम से बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। डॉ. हर्षवर्धन ने स्थापना दिवस के अवसर पर सीएसआईआर-आईएमएमटी को बधाई दी और व्यर्थ पदार्थों को वैज्ञानिक तरीके से संपत्ति में बदलने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के पास मानव द्वारा महसूस की जा रही प्रत्येक समस्या का समाधान निकालने की क्षमता है। भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रत्येक अवसर पर सदैव कठिन परिश्रम किया है। उन्होंने देश में विभिन्न संस्थानों में कोविड-19 से निपटने के लिए नवाचार-विचार और उत्पाद विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों के उल्लेखनीय योगदान का स्मरण कराया। उन्होंने वैज्ञानिकों से लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए नये दृष्टिकोण अपनाने और अनुसंधान करने की दिशा में मंथन करने का आह्वन किया।
इस अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन ने संस्थान की 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट, सीएसआईआर-आईएमएमटी का वीडियो और सीएसआईआर-आईएमएमटी का गीत जारी करने के साथ संस्थान की वेबसाइट का लोकार्पण किया तथा संस्थान की ई-प्रदर्शनी का उद्घाटन किया । आयोजन में सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक प्रोफेसर एस. बसु, स्थापना दिवस समारोह समिति के अध्यक्ष डॉ. ए.के. साहू, कई वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए।
आईएमएमटी, सीएसआईआर का कार्य खनिज, पदार्थ और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की संभावना का पता लगाना है। इसका गठन क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, भुवनेश्वर के रूप में वर्ष 1964 में किया गया था और 13 अप्रैल, 2017 को इसका नाम परिवर्तित करके खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान कर दिया गया था। आईएमएमटी में अनुसंधान और विकास पर जोर दिया जाता है, ताकि भारतीय उद्योगों द्वारा उन्नत प्रक्रिया और स्वदेशी प्राकृतिक संसाधनों के वाणिज्यिक दोहन के लिए परामर्श सेवाओं तथा विज्ञान और इंजीनियरी अनुप्रयोग के क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता का मूल अनुसंधान करने से आत्मनिर्भरता की चुनौतियों से निपटा जा सके।
डॉ. शेखर मांडे ने इस मौके पर कहा कि आईएमएमटी ने पेयजल और औद्योगिक जल के स्रोतों की रासायनिक और जैविक जांच के लिए एनएबीएल प्रत्यायित केन्द्र स्थापित किया है। आईएमएमटी का वाटर फिल्ट्रेशन मीडिया जिसे टेराफिल कहा जाता है, जल उपचार प्रौद्योगिकी के लिए बहुत कम लागत का समाधान प्रदान करता है।
उन्होंने महामारी की स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में उपयोग में आने वाले सहायक उपकरणों और पीपीई किट, टचलेस सेनेटाइजेशन उपकरण, हैंड सेनेटाइजर, एंटी वायरल स्प्रे मशीन आदि विकसित करने में संस्थान की भूमिका की सराहना की। इन उत्पादों की प्रौद्योगिकी के लाइसेंस विभिन्न सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों को दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आईएमएमटी राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ओडिशा के आकांक्षी जिले नवरंगपुर में सामाजिक आर्थिक विकास कार्यक्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित बहु-प्रयोगशाला कृषि हस्तक्षेप में अग्रणी है।

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