जानिए, कौन है वो कारोबारी जिसने राम मंदिर के लिए दिया 11 करोड़ रूपये का चंदा

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राम मंदिर निर्माण के लिए सूरत के व्यापारी गोविंदभाई ढोलकिया ने 11 करोड़ रुपये का दान किया है. आरएसएस से जुड़े रहे गोविंदभाई कुछ साल पहले दिवाली पर सैकड़ों कर्मचारियों और उनके परिजनों को कंपनी के खर्चे पर 10 दिन का टूर पैकेज देकर चर्चा में आए थे. महज सातवीं तक पढ़ाई के बावजूद अरबों का कारोबार खड़े करने वाले गोविंदभाई की कहानी  प्रेरक है.

गोविंदभाई गोविंदभाई सूरत में हीरा के व्यापारी हैं और श्री रामकृष्ण एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन हैं. वे वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए हैं. वे एक विजनरी कारोबारी तो हैं ही काफी धार्मिक व्यक्ति भी हैं. उन्होंने ज्यादा फॉर्मल एजुकेशन हासिल नहीं किया है और न ही उनका हीरों का कोई खानदानी कारोबार रहा है, इसके बावजूद अपने दम पर वे हीरा कारोबार के दिग्गज बन गए.

गुजरात के एक छोटे से गांव में जन्म

देश को आजादी मिलने के कुछ ही महीनों बाद 7 नवंबर 1947 को जन्मे ढोलकिया अब करीब 73 साल के हो चुके हैं. उनका जन्म गुजरात के एक ​छोटे से गांव दुधाला में एक किसान परिवार में हुआ था. उनका जीवन काफी अभावों में बीता और शायद इसीलिए ढोलकिया के मन में बचपन से ही हालात को बदलने की एक दृढ़ता-सी पैदा हो गयी.

वर्षों की कड़ी मेहनत

उन्हें सातवीं में ही पढ़ाई छोड़कर अपने बड़े भाई भीमजी के साथ सूरत जाना पड़ा. वहां साल 1964 में उन्होंने डायमंड पॉलिश करने का काम शुरू किया. उन्होंने वहां वर्षों तक एक डायमंड पॉलिशिंग वर्कर के रूप में कड़ी मेहनत की. बाद में अपने दो दोस्तों के साथ 12 मार्च 1970 में हीरों का अपना कारखाना शुरू किया.

हीरों का कारोबार अच्छी तरह से जमाने के बाद उन्होंने 1977 में श्री रामकृष्ण एक्सपोर्ट (SRK Export) के नाम से अपना अपना निर्यात कारोबार शुरू किया. आज यह दुनिया के कई देशों में कारोबार करने वाली एक दिग्गज कंपनी बन चुकी है.

दिग्गज हीरा कारोबारी

आज गोविंदभाई ढोलकिया देश के शीर्ष हीरा कारोबारियों में से एक हैं. उनकी पत्नी चम्पाबेन गोविंदभाई ढोलकिया पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन वह सूरत की सबसे अमीर महिलाओं में से हैं.

कर्मचारियों को तोहफा

चार साल पहले दिवाली पर गोविंदभाई ढोलकिया तब काफी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपने कर्मचारियों को उनके परिवार के साथ 10 दिन के पेड लीव पर भेजा. इस तोहफे के तहत उन्होंने पूरी एक एसी ट्रेन बुक कराई और 300 कर्मचारियों के परिजनों सहित करीब 900 लोगों को कंपनी के खर्च पर उत्तराखंड टूर पर भेजा.

 

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