ITR फाइल करने की अंतिम तारीख एक बार फिर बढ़ी, अब इस तारीख तक मिली छूट

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आकलन वर्ष 2020-21 (वित्त वर्ष 2019-20) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख को 10 दिन और बढ़ा दिया गया है। अब व्यक्तिगत आयकरदाताओं के लिए आयकर दाखिल करने की अंतिम तारीख 10 दिन बढ़ाकर 10 जनवरी, 2021 कर दी गई है। वहीं, कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2019-20 का आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 15 दिन बढ़ाकर 15 फरवरी, 2021 की गई है। यह दूसरी बार है जब आयकर रिटर्न भरने की तारीख को आगे बढ़ाया गया है। इसके अलावा GST रिटर्न फाइलिंग की डेट भी बढ़ाई गई है। GST एक्ट 2017 के तहत सालाना रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 28 फरवरी 2021 तक कर दी गई है। इससे पहले कोरोना के कारण आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 किया गया था, जबकि आमतौर पर यह अवधि 31 जुलाई होती है।

 

29 दिसंबर तक 4.54 करोड़ आईटीआर दाखिल
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 29 दिसंबर तक 4.54 करोड़ आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। आयकर विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी थी।  इससे पिछले वित्त वर्ष में तुलनात्मक अवधि तक 4.77 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे। बिना विलंब शुल्क के वित्त वर्ष 2018-19 (आकलन वर्ष 2019-20) के लिए अंतिम तिथि तक 5.65 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे। पिछले साल आयकर रिटर्न दाखिल करने की तारीख को 31 अगस्त, 2019 तक बढ़ाया गया था।  दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में से 2.52 करोड़ करदाताओं ने आईटीआर-1 दाखिल किया है। पिछले साल 29 अगस्त, 2019 तक यह आंकड़ा 2.77 करोड़ का रहा था। 29 दिसंबर तक एक करोड़ आईटीआर-4 दाखिल किए गए। वहीं 29 अगस्त, 2019 तक 99.50 लाख आईटीआर-4 दाखिल किए गए।

किस वर्ग के लिए कौन-सा आईटीआर फॉर्म
आईटीआर-1 सहज फॉर्म को कोई भी सामान्य निवासी जिसकी सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक नहीं है, अपनी व्यक्तिगत आय के बारे में जानकारी देते हुए भर सकता है। आईटीआर- 4 सुगम फॉर्म को ऐसे निवासी व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार और फर्म (एलएलपी को छोड़कर) द्वारा भरा जा सकता है जिनकी व्यवसाय और किसी पेशे से अनुमानित आय 50 लाख रुपए तक है। वहीं आईटीआर- 3 और 6 व्यवसायियों के लिए, आईटीआर- 2 आवासीय संपत्ति से आय प्राप्त करने वाले लोगों द्वारा भरा जाता है। आईटीआर- 5 फॉर्म एलएलपी और एसोसिएशन ऑफ पर्सन के लिए, वहीं आईटीआर- 7 उन लोगों के लिए है जिन्हें ट्रस्ट अथवा अन्य कानूनी दायित्वों के तहत रखी गई संपत्ति से आय प्राप्त होती है।

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