लड़कियों के लिये दस किलोमीटर के दायरे में उच्च शिक्षा की व्यवस्था होगी : खट्टर

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि राज्य सरकार ने पहले लड़कियों के लिए 20 किलोमीटर दायरे में एक कॉलेज बनाने की योजना बनाई थी जिसे अब 15 किलोमीटर कर दिया गया है। जल्द ही यह सीमा कम कर 10 किलोमीटर की जाएगी ताकि बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े।

खट्टर ने यह बात आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी में नवनिर्मित शैक्षणिक ब्लॉक का उद्घाटन करने के उपरांत अपने सम्बोधन में कही। उन्होंने कहा कि देश के सुप्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर बने इस ब्लॉक के शुरू होने से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इस शैक्षणिक ब्लॉक नाम महान गणितज्ञ रामानुजन नाम पर रखने से वह स्वयं भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं क्योंकि वह भी गणित के विद्यार्थी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रामानुजन कॉलेज के समय से ही मेधावी छात्र थे और वर्ष 1912 में उन्होंने एक ऐसा कैलेंडर बनाया था जिससे किसी भी दिन और तारीख का पता लगाया जा सकता था। मुख्यमंत्री ने लगभग 50 साल पहले की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक मेले में उन्होंने 20 साल का कैलेंडर देखा तो मन ख्याल आया कि यह कैलेंडर 20 साल से ज्यादा का क्यों नहीं हो सकता। इस पर काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने भी ऐसा ही कैलेंडर बनाया जिससे किसी भी दिन और तारीख का पता लगाया जा सकता था।

खट्टर ने कहा कि रामानुजन की ख्याति धीरे-धीरे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी तक पहुंच गई और प्रोफेसर हार्डी ने उन्हें वहां आने का आमंत्रण दिया तो उस आमंत्रण का जवाब उन्होंने 100 सूत्रों में दिया और पांच साल तक वहां शोध किया। इसी तरह, एक बार बीमार पड़ने पर जब प्रोफेसर हार्डी उन्हें देखने गए तो रामानुजन ने उनकी कार का नम्बर पढ़ लिया और उसकी कई विशेषताओं का जिक्र किया। प्रोफेसर हार्डी ने उस नम्बर की तीन विशेषताओं का तो पता लगा लिया लेकिन चौथी विशेषता का पता 21 साल बाद उनके किसी शिष्य ने लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें भी इस नाम से प्रेरणा लेनी चाहिए और सुझाव दिया कि इस ब्लॉक में गणित की शिक्षा शुरू की जाए और विद्यार्थियों को वैदिक गणित में भी शिक्षित किया जाए।

उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अंग्रेजों के समय से चली आ रही ‘क्लर्क पैदा करने की’ शिक्षा पद्धति में आमूल-चूल परिवर्तन कर कौशल विकास और आईटी जैसे आज की जरूरतों के मुताबिक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। साथ ही, इस शिक्षा नीति में विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य और संस्कार विकसित करने पर भी विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का बेहतरीन बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है। छोटा प्रदेश होने के बावजूद आज प्रदेश में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को मिलाकर लगभग 50 विश्वविद्यालय हैं जिनमें सामान्य शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी, प्रौद्योगिकी, खेल, चिकित्सा और आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे अपने आस-पास के क्षेत्र की समस्याओं का पता लगाएं और उनका अध्ययन करें। सरकारी व सामाजिक कार्यों में लोगों का सहयोग करें और आत्ननिर्भर बनने में उनकी मदद करें। इसके अलावा, अपने यहां कम से कम एक महापुरुष के नाम से पीठ स्थापित करके उनके विचारों का अध्ययन करें। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाएं, उन्हें हर तरह का सहयोग दिया जाएगा।

खट्टर ने कहा कि विद्यार्थी का पासपोर्ट बनवाना सम्बन्धित विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी की बनती है ताकि उन्हें इसके लिए परेशान न होना पड़े। साथ ही, कई विद्यार्थियों को पैसे के अभाव में उच्च शिक्षा के लिए कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके लिए सरकारी गारंटी पर सस्ते लोन की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक कोष भी बनाया गया है ताकि अगर किसी विद्यार्थी को लोन चुकाने में दिक्कत होती है तो इस कोष से वह राशि चुकाई जा सके। उन्होंने कहा कि बीपीएल, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के बच्चों की कोचिंग के लिए कोचिंग सेंटर बनाए गए हैं। गरीब बच्चों के लिए छात्रावास योजना शुरू की गई है। स्कूली बच्चों की कोचिंग के लिए ‘सुपर 100’ नामक योजना के तहत दो सेंटर खोले गए हैं। इन केन्द्रों की सफलता को देखते हुए ऐसे दो और केन्द्र खोले जाएंगे।

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