महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: शिवराज

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में अधिक से अधिक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए तथा स्व-सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। आधिकारिक जानकारी में चौहान ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बैंक लिंकेज पोर्टल पर प्रकरणों की प्रस्तुति एवं उनकी स्वीकृति की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम रहा है। मध्यप्रदेश के प्रस्तुत 82 हजार 342 महिला स्व-सहायता समूहों के प्रकरणों में से 32 हजार 62 एसएचजी के प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश भारत में प्रथम आया है। मध्यप्रदेश में इस वर्ष मनरेगा के अंतर्गत अभी तक 22810 ग्राम पंचायतों में से 22108 ग्राम पंचायतों में सक्रिय 01 करोड़ 14 लाख 66 हजार सक्रिय मजदूरों में से 20 लाख 17 हजार 56 मजदूरों को प्रतिदिन नियोजित किया जा रहा है, जो भारत में सर्वाधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को बधाई दी। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन में भी दिए गए लक्ष्य की पूर्ति में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है।
प्रदेश में मार्ग निर्माण की लंबाई के 2550 कि.मी. के लक्ष्य के विरूद्ध 1010 कि.मी. मार्ग निर्माण किया गया जो लक्ष्य का 39.62 प्रतिशत है तथा भारत में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रीन टैक्नोलॉजी के अंतर्गत प्लास्टिक वेस्ट से सर्वाधिक लंबाई 7.5 हजार कि.मी. के मार्ग निर्मित किए गए। इस कार्य में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम रहा है। ई-मार्ग पोर्टल के माध्यम से कार्यों के भुगतान में भी मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण के 2370 कार्यों में से 2166 का भुगतान प्रारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी मध्यप्रदेश में अच्छा कार्य हुआ है।
इसमें मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में 23 लाख 63 हजार 777 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से 17 लाख 59 हजार 675 आवास पूर्ण कर लिए गए हैं। चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक समरस पंचायतें हों, ऐसे प्रयास किए जाएं। इसके लिए अभियान चलाया जाए। इनमें सरपंच निर्विरोध चुने जाते हैं, जिससे चुनाव में व्यय होने वाली राशि ग्राम के विकास में खर्च होती है। शासन द्वारा समरस पंचायतों को विकास के लिए अतिरिक्त राशि भी प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की मॉनीटरिंग के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर दीनदयाल अंत्योदय समितियों को सक्रिय किया जाए।
इनमें सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गैर राजनैतिक व्यक्तियों को शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीईओ जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जाए। अच्छा कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि मनरेगा के अंतर्गत बंजर भूमियों को उपजाऊ बनाने के कार्य प्राथमिकता से लिए जाने चाहिए। खेत-सड़क योजना को गति दी जाए। मनरेगा योजना के अंतर्गत प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कुल 86 लाख 37 हजार मजदूरों को रोजगार दिया गया है, इनमें 36 लाख 87 हजार महिलाएं हैं। कार्यों में प्रतिदिन लगभग 20 लाख श्रमिकों का नियोजन किया जा रहा है, जो भारत में सर्वाधिक है।
प्रदेश में मनरेगा के अंतर्गत सिंचाई परियोजना के कमांड एरिया में अंतिम छोर के किसान तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने के लिए ‘वाटर कोर्स चैनल’ का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। स्व-सहायता समूह संघ भवन निर्माण के कार्य की भी मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की। बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया, पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राम खेलावन पटेल, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मनोज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

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