तिल का इस्तेमाल सर्दियों में है फायदेमंद, जानिए कैसे बना सकते हैं डाइट का हिस्सा

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तिल का इस्तेमाल खास तौर से सर्दी के मौसम में बड़े पैमाने पर होता है. पोषण से भरपूर ये छोटे, कुरकुरे बीज बहुत सारे पकवान की तैयारी में शामिल किए जाते हैं. इसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने को जायकेदार बनाता है बल्कि सेहत को भी हैरतअंगेज फायदे मुहैया करता है.

सर्दी की रोजाना डाइट में स्वादिष्ट बीज को जोड़ना चाहिए. डाइट में शामिल करने के कई तरीके हो सकते हैं. तरीकों को जानने से पहले रोजाना तिल के इस्तेमाल के हैरतअंगज फायदों को समझना ठीक रहेगा.

कैंसर रोकता है
सफेद तिल के बीज में मौजूद मैग्नीशियम कैंसर रोधी गुणों की पहचान रखता है. तिल में कैंसर रोधी यौगिक फाइटेट भी पाया जाता है. माना जाता है कि शरीर में ट्यूमर के खतरे को ये कम करता है और इस तरह कैंसर से बचाता है.

पाचन के लिए शानदार
तिल के बीजों में मिलनेवाला फाइबर पाचन के लिए मुफीद है. उच्च फाइबर की मात्रा आंत के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करती है और पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज को रोकती है.

दिल की सेहत के लिए ठीक
तिल में एंटी ऑक्सीडेंट्स और सूजन रोधी गुण दिल के स्वास्थ्य के लिए मुफीद हैं. इन बीजों में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी पाया जाता है. इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रोल कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है.

अस्थमा को रोकता है
सांस की समस्याओं जैसे अस्थमा से पीड़ित महिलाओं को तिल का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. तिल में मैग्नीशियम पाए जाने की वजह से अस्थमा और अन्य सांस संबंधी तकलीफों को रोकने का काम करता है.

ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है
आज कल महिलाओं के स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हाईपरटेंशन प्रमुख है. तिल के इस्तेमाल से हाई ब्लड प्रेशर को रोकने में मददगार होता है क्योंकि उसमें मैग्नीशियम पाया जाता है. इसके अलावा, पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स और सीसेमिन नामक यौगक भी बीज में मौजूद होता है. ये दोनों मिलकर शरीर के ब्लड प्रेशर लेवल को काबू में रखते हैं.

हड्डियों के स्वास्थ्य को ठीक करता है
35 साल के बाद महिलाओं को तिल का सेवन बढ़ाने की सलाह दी जाती है. इस उम्र में हड्डी का द्रव्यमान कम होने लगता है और इसलिए फ्रैक्चर की ज्यादा आशंका रहती है. तिल खास तौर से मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए स्वस्थ्य समझा जाता है. तिल का इस्तेमाल न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए बल्कि आपकी स्किन के लिए भी शानदार है. तिल में ओमेगा फैट्टी एसिड बालों के विकास को बढ़ाता है और बाल झड़ने की समस्या को रोकता है.

तिल भारतीय घरों का लंबे समय से हिस्सा रहा है. आम तौर से सर्दी में तिल का लड्डू बनाकर खाया जाता है. ये लड्डू चीनी या गुड़ और तिल के साथ तैयार किए जाते हैं. इसके अलावा, डाइट में शामिल करने के लिए नूडल्स, चावल या सलाद पर तिल छिड़ककर इस्तेमाल किया जा सकात है. ये बीज आपके नियमित भोजन को कुरकुरा बना देते हैं.

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