जंगल की आग पर उत्तराखंड में हाई अलर्ट, सेटेलाइट आधारित फायर अलार्म सिस्टम होगा शुरू

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विषम भूगोल और 71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड में सर्दी की दस्तक के साथ ही जंगलों के धधकने का क्रम शुरू होने के मद्देनजर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सभी वन प्रभागों को अपने- अपने क्षेत्रों में चौबीसों घंटे वनकर्मियों की टीमें सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। रविवार से राज्य में सेटेलाइट आधारित फायर अलर्ट सिस्टम भी शुरू किया जा रहा है, जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से यह सूचनाएं रेंज स्तर तक पहुंचाई जाएंगी, जिससे कहीं भी आग की सूचना पर उसे तुरंत बुझाने को कदम उठाए जा सकें।

जंगलों की आग के लिहाज से फायर सीजन (15 फरवरी से मानसून के आगमन तक का समय) प्रारंभ होने में भले ही वक्त हो, राज्य में जंगल अभी से सुलगने लगे हैं। पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी व उत्तरकाशी जिलों के जंगल हाल में धधके हैं। वन महकमे द्वारा कारणों की पड़ताल की गई तो बात सामने आई कि अक्टूबर में बारिश न होने से जंगलों में नमी कम हो गई है। जगह-जगह घास भी सूख चुकी है या सूखने के कगार पर है। यही नहीं, आग की घटनाएं भी उन क्षेत्रों में अधिक हो रहीं, जहां वन सीमा से सटे खेतों में अगली फसल की बुआई के मद्देनजर कूड़ा जलाया गया।

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