इस साल एक साथ पड़ रहा है ईद मिलाद-उन-नबी और शरद पूर्णिमा

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इस वर्ष हिंदुओं का त्योहार शरद पूर्णिमा, कोजागरा या कोजागरी लक्ष्मी पूजा और मुस्लिमों के पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्मदिन ईद मिलाद-उन-नबी का जश्न एक साथ मनाया जायेगा. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, ईद मिलाद-उन-नबी तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन मनाया जाता है.

इसकी सही तारीख को लेकर इस बार मतभेद है. ईद मिलाद-उन-नबी इस बार 29 अक्टूबर की शाम से 30 अक्टूबर की शाम तक रहेगा, लेकिन भारत में इस त्योहार को 30 अक्टूबर को ही सेलिब्रेट किया जायेगा. 30 अक्टूबर की शाम को 5:20 बजे से शरद पूर्णिमा है, जिस दिन बिहार में कोजागरा और बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा या लक्खी पूजा मनाया जायेगा.

 

इस्लामी चंद्र कैलेंडर के मुताबिक, भारत में 19 अक्टूबर से रबी-उल-अव्वल का महीना शुरू हो चुका है. भारत के अलावा पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी 30 अक्टूबर को ही ईद मिलाद-उन-नबी की दावत होगी. पैगंबर मोहम्मद साहब की याद में इस दिन समुदाय के लोग जुलूस निकालते हैं. हालांकि, इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जुलूस नहीं निकलेंगे.

ज्ञात हो कि 571 इस्वी में 12 तारीख को अरब के रेगिस्तान में स्थित शहर मक्का में पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ था. उनके जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था. पैगंबर जब 6 वर्ष के थे, तो उनकी मां भी इस जहां से रुखसत हो गयीं. पैगंबर मोहम्मद की मां के निधन के बाद उनके चाचा अबु तालिब और दादा अबु मुतालिब ने उन्हें पाला-पोसा.

अब्दुल्लाह और बीबी अमीना के घर जन्मे पैगंबर मोहम्मद मूर्ति पूजा या किसी भी चित्र की पूजा के सख्त खिलाफ थे. यही वजह है कि उनकी कहीं भी तस्वीर या मूर्ति नहीं मिलती. इस्लाम में भी मूर्ति पूजा की मनाही है. बताया जाता है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि जो भी व्यक्ति उनकी तस्वीर बनायेगा, अल्लाह उसे सजा देगा.

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